ശ്രീ-ദയിത-ദാസ, കീര്തനേതേ ആശ,
കര ഉച്ഛൈഃ-സ്വരേ ‘ഹരി-നാമ-രവ’।
കീര്തന-പ്രഭാവേ, സ്മരണ സ്വഭാവേ,
സേ കാലേ ഭജന-നിര്ജന സംഭവ॥19॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥