జగన్నాథాష్టకం పుణ్యం యః పఠేత్ ప్రయతః శుచి।
సర్వపాప-విశుద్ధాత్మా విష్ణులోకం స గచ్ఛతి॥9॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥