বৃন্দাবনস্যাষ্টকমেতদুচ্চৈঃ,
পঠন্তি যে নিশ্চলবুদ্ধযস্তে।
বৃন্দাবনেশাংঘ্রি-সরোজসেবাং,
সাক্ষাল্লভন্তে জনুষোঽন্ত এব॥9॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥