(1) राधाजी, कृष्ण के प्रति शुद्ध प्रेम से बनी हैं और हरि राधाजी के प्रति शुद्ध प्रेम से बने हैं- जन्म में या मृत्यु में, राधा और कृष्ण ही मेरे नित्य आश्रय हैं।
(2) राधाजी कृष्ण का खजाना हैं और हरि राधा का खजाना हैं- जन्म में या मृत्यु में, राधा और कृष्ण मेरे नित्य आश्रय हैं।
(3) राधा-कृष्ण की प्राण-शक्ति से वयाप्त हैं और कृष्ण राधा की प्राण-शक्ति से वयाप्त हैं। - जन्म में या मृत्यु में, राधा और कृष्ण मेरे नित्य आश्रय हैं।
(4) राधाजी कृष्ण में पूर्णतः विलीन हैं और कृष्ण या हरि राधा में पूर्णतः विलीन हैं- जन्म में या मृत्यु में, राधा और कृष्ण मेरे नित्य आश्रय हैं।
(5) राधा-कृष्ण के शरीर में स्थित हैं और हरि राधा की देह में स्थित हैं- जन्म में या मृत्यु में, राधा और कृष्ण मेरे नित्य आश्रय हैं।
(6) राधा-कृष्ण के हृदय में स्थिर हैं और हरि राधा के हृदय में स्थिर हैं- जन्म में या मृत्यु में, राधा और कृष्ण मेरे नित्य आश्रय हैं।
(7) राधा नीले रंग के वस्त्र पहनती हैं और हरि पीले रंग के वस्त्र पहनते हैं- जन्म में या मृत्यु में, राधा और कृष्ण मेरे नित्य आश्रय हैं।
(8) राधा वृन्दावन की वामिनी हैं और कृष्ण वृन्दावन के स्वामी हैं- जन्म में या मृत्यु में, राधा और कृष्ण मेरे नित्य आश्रय हैं।
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥