vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
वैष्णव भजन
»
जय जय जगन्नाथ
ଜଯ ଜଯ ଜଗନ୍ନାଥ
ଶ୍ରୀଲ ଵାସୁଦେଵ ଘୋଷ
भाषा:
हिन्दी
|
English
|
தமிழ்
|
ಕನ್ನಡ
|
മലയാളം
|
తెలుగు
|
ગુજરાતી
|
বাংলা
|
ଓଡ଼ିଆ
|
ਗੁਰਮੁਖੀ
|
ଜଯ ଜଯ ଜଗନ୍ନାଥ ଶଚୀର ନଂଦନ
ତ୍ରିଭୁଵନେ କରେ ଜାର ଚରଣ ଵଂଦନ॥1॥
ନୀଲାଚଲେ ଶଂଖ-ଚକ୍ର-ଗଦା-ପଦ୍ମ-ଧର
ନଦୀଯା ନଗରେ ଦଣ୍ଡ-କମଣ୍ଡଲୁ-କର॥2॥
କେହ ବୋଲେ ପୂରବେ ରାଵଣ ଵଧିଲା
ଗୋଲୋକେର ଵୈଭଵ ଲୀଲା ପ୍ରକାଶ କରିଲା॥3॥
ଶ୍ରୀ-ରାଧାର ଭାଵେ ଏବେ ଗୋରା ଅଵତାର
ହରେ କୃଷ୍ଣ ନାମ ଗୌର କରିଲା ପ୍ରଚାର॥4॥
ଵାସୁଦେଵ ଘୋଷ ବୋଲେ କରି ଜୋଡ଼ ହାଥ
ଜେଇ ଗୌର ସେଇ କୃଷ୍ଣ ସେଇ ଜଗନ୍ନାଥ॥5॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×