কেহ বোলে পূরবে রাবণ বধিলা
গোলোকের বৈভব লীলা প্রকাশ করিলা॥3॥
শ্রী-রাধার ভাবে এবে গোরা অবতার
হরে কৃষ্ণ নাম গৌর করিলা প্রচার॥4॥
বাসুদেব ঘোষ বোলে করি জোড় হাথ
জেই গৌর সেই কৃষ্ণ সেই জগন্নাথ॥5॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥