ವಿಶಾಖಾದಿ ಸಖೀಜನ ನಾನಾ ರಾಗೇ ಗಾಯೇ।
ಪ್ರಿಯನರ್ಮ ಸಖೀಜತ ಚಾಮರ ಢುಲಾಯ॥5॥
ಶ್ರೀರಾಧಾ-ಮಾಧವ-ಪದ ಸರಸಿಜ ಆಶೇ।
ಭಕ್ತಿವಿನೋದ ಸಖೀ, ಪದೇ ಸುಖೇ ಭಾಸೇ॥6॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥