মদন-মোহন রূপ ত্রিভঙ্গ সুংদর।
পীতাম্বর শিখিপুচ্ছ চূড়া মনোহর॥2॥
ললিত মাধব-বামে বৃষভানূ, কন্যা।
(সু)নীল-বসনা গৌরী রূপে গুণে ধন্যা॥3॥
নানাবিধ অলংকার করে ঝলমল।
হরিমন-বিমোহন বদন উজ্জ্বল॥4॥
বিশাখাদি সখীজন নানা রাগে গাযে।
প্রিযনর্ম সখীজত চামর ঢুলায॥5॥
শ্রীরাধা-মাধব-পদ সরসিজ আশে।
ভক্তিবিনোদ সখী, পদে সুখে ভাসে॥6॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥