ಲಲಿತಾದಿ ಸಖೀಗಣ ಅವಶೇಷ ಪಾಯ।
ಮನೇ-ಮನೇ ಸುಖೇ ರಾಧಾ-ಕೃಷ್ಣ ಗುಣ ಗಾಯ॥16॥
ಹರಿಲೀಲಾ ಏಕಮಾತ್ರ ಜಾಁಹಾರ ಪ್ರಮೋದ।
ಭೋಗಾರತಿ ಗಾಯ ಠಾಕುರ ಭಕತಿ ವಿನೋದ॥17॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥