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नितार्इ नाम हाटे, ओ के जाबिरे भाइ Hindi Srila Bhaktivinoda Thakura Shrila Bhaktivinoda Thakura 1 nitai nam hate o ke jabire bhai ay chute ese pasanda jagai madhai dujan sakal hater mal nile jute 2 hater amsi mahajon sri adwaita sanatan bhan वैष्णव आचार्यों के गीत एवं भजन | Bhajan & Aarti of Vaishnav Acharyas ISKCON songs
 
वैष्णव भजन  »  नितार्इ नाम हाटे, ओ के जाबिरे भाइ
 
 
नितार्इ नाम हाटे, ओ के जाबिरे भाइ 
श्रील भक्तिविनोद ठाकुर       
भाषा: हिन्दी | English | தமிழ் | ಕನ್ನಡ | മലയാളം | తెలుగు | ગુજરાતી | বাংলা | ଓଡ଼ିଆ | ਗੁਰਮੁਖੀ |
 
 
नितार्इ नाम हाटे, ओ के जाबिरे भाइ, आय छुटे
एशे पाषण्ड जगार्इ माधार्इ दु – जन सकल हाटेर माल निले जुटे॥1॥
 
 
हाटेर अंशी महाजन, श्री अद्वैत, सनातन
भंडारी श्रीगदाधर पण्डित विचक्षण॥2॥
 
 
आछेन चौकिदार हरिदास आदि हलेन श्री सञ्जय
श्री श्रीधर माते दालाल केशव भारती, श्री विद्या वाचस्पति
परिचारक आछेन कृष्णदास प्रभृति
होन कोषाध्यक्ष श्रीवास पण्डित, झाडुदार केदार जुते॥3॥
 
 
हाटे र मूल्य निरुपण, नयभक्ति प्रकाशन
प्रेम हेनो मुद्रा सर्वसार, संयमन नाइ कमी बेशी समान॥4॥
 
 
ओ, जन रे, सब एतो मने बोझाय उठे
एइ प्रेमेर उद्देश, एक साधु उपदेश
सुधा – मोय हरिनाम रूप सु – संदेश,
एते बरो नाइ रे द्वेशाद्वेश
खाय एक पाते कानु – कुठे॥5॥
 
 
शब्दार्थ
(1) ओ भाइयों! पवित्र नाम के हाट में नित्यानंद उपस्थित हैं। जो भी उन्हें देखने के लिए आ रहा हैं, भाग कर आओ ! दो बड़े दुष्ट शैतान, जगाई और माधाई ने हाट लूट लिया हैं और सारी संपत्ति ले ली हैं।
 
 
(2) वहां आपको अंशी महाजन मिलेंगे, श्री अद्वैत आचार्य और सनातन गोस्वामी। निपुण गदाधर पंडित भंडारी हैं।
 
 
(3) हरिदास ठाकुर और अन्य कुछ लोग चौकीदार हैं, संजय और श्रीधर संवाहक हैं, केशव भारती तथा विद्या-वाचसपति दलाल हैं, तथा कृष्णदास तथा कुछ अन्य लोग सेवक हैं। श्रीवास पंडित कोषाध्यक्ष हैं और केदारनाथ उपयुक्त रूप से झाड़ूदार हैं।
 
 
(4) हाट में समान का मूल्य नवधा भक्ति मय सेवा की विधि हैं, खरीदने के लिए मुद्रा प्रेम हैं, जो उत्तम रस हैं। सामान खरीदने के लिए कोई प्रतिबंध नहीं हैं। यहाँ, दोनों प्रकार के ग्राहक- जिनके पास बहुत संपत्ति हैं या जिनके पास कम संपत्ति हैं - सभी एक समान माने जाते हैं।
 
 
(5) अरे लोगों, जितना भी सामान चाहिए उतना भर लो - यहाँ कोई आभाव नहीं हैं। यह भगवत प्रेम प्राप्त करने के लिए अच्छा परामर्श हैं। इस हाट का शुभ समाचार भगवान हरि के अमृतमय नाम के रूप में आता हैं। इस आशीर्वाद को प्राप्त करते समय, कोई दुर्भावना या पक्षपात ना हो। चाहे वह जो हो, सबको एक ही थाली से खाने दो।
 
 
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥