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वैष्णव भजन
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भज हूँ रे मन
ભજ હૂઁ રે મન
શ્રીલ ગોવિંદ દાસ કવિરાજ
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ભજહુઁ રે મન શ્રીનન્દનન્દન,
અભય ચરણારવિન્દ રે।
દુર્લભ માનવ-જનમ સત્સંગે,
તરહ એ ભવ સિન્ધુ રે॥1॥
શીત આતપ, વાત વરિષણ,
એ દિન યામિની જાગિ’રે।
વિફલે સેવિનુ કૃપણ દુર્જન,
ચપલ સુખ-લવ લાગિ’રે॥2॥
એ ધન, યૌવન, પુત્ર પરિજન,
ઇથે કિ આછે પરતીતિ રે।
કમલદલ-જલ, જીવન ટલમલ,
ભજહુઁ હરિપદ નીતિ રે॥3॥
શ્રવણ, કીર્તન, સ્મરણ,
વન્દન, પાદસેવન, દાસ્ય રે।
પૂજન, સખીજન, આત્મનિવેદન,
ગોવિન્દ દાસ અભિલાષ રે॥4॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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