(কৃষ্ণ প্রেম যদি চাও রে)
(স্মর) গোষ্টি সহ কর্ণপূর, সেন শিবানংদ
(অজস্ত্র স্মর, স্মর রে)
(স্মর) রুপানুগ সাধু-জন ভজন-আনংদ॥4॥
(ব্রজে বাস যদি চাও রে)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥