ವಾರ್ದ್ಧಕ್ಯೇ ಏಖನ, ಭಕತಿವಿನೋದ,
ಕಾಁದಿಯಾ ಕಾತರ ಅತಿ।
ನಾ ಭಜಿಯಾ ತೋರೇ, ದಿನ ವೃಥಾ ಗೇಲ,
ಏಖನ ಕಿ ಹಬೇ ಗತಿ?॥7॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥