(কৃষ্ণ-নামে অনুরাগ তো হবে হে)
তখন-অনাযাসে সফল হবে জীবের জীবন
(কৃষ্ণ রতি বিনা জীবন তো মিছে হে)
শেষে-বৃন্দাবনে রাধা-শ্যামের পাবে দর্শন
(গৌর-কৃপা হলে হে)॥3॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥