মাযাজালে বদ্ধ হযে, আছ মিছে কাজ ল’যে,
এখনও চেতন পে’যে।
রাধা মাধব নাম বোলো রে॥2॥
জীবন হইল শেষ, না ভজিলে হৃষীকেশ,
ভক্তিবিনোদ-(এই) উপদেশ,
এক বার নামরসে মাত রে॥3॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥