জীবের কল্যাণ-সাধন-কাম
জগতে আসি’ এ মধুর নাম।
অবিদ্যা-তিমির-তপনরূপে,
হৃদ-গগনে বিরাজে॥7॥
কৃষ্ণ নাম-সুধা করিযা পান,
জুড়াও ভকতিবিনোদ-প্রাণ।
নাম বিনা কিছু নাহিক আর,
চৌদাভুবন-মাঝে॥8॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥