পূর্ব ইতিহাস, ভুলিনু সকল,
সেবা-সুখ-পেযে মনে।
আমি ত’তেোমার তুমি ত’ আমার,
কি কাজ অপর ধনে॥5॥
ভকতিবিনোদ, আনন্দে ডুবিযা,
তোমার সেবার তরে।
সব চেষ্টা করে, তব ইচ্ছা-মত,
থাকিযা তোমার ঘরে॥6॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥