ও, জন রে, সব এতো মনে বোঝায উঠে
এই প্রেমের উদ্দেশ, এক সাধু উপদেশ
সুধা – মোয হরিনাম রূপ সু – সংদেশ,
এতে বরো নাই রে দ্বেশাদ্বেশ
খায এক পাতে কানু – কুঠে॥5॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥