કબે ગોવર્ધન-ગિરિ, દેખિબ નયન ભરિ’,
કબે હ’બે રાધાકુણ્ડ વાસ।
ભ્રમિતે ભ્રમિતે કબે, એ દેહ પતન હ’બે,
કહે દીન નરોત્તમદાસ॥5॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥