హేన గౌర దయామయ, ఛాड़ి’ సబ లాజ-భయ,
కాయమనే లహ రే శరణ।
పరమ దుర్మతి ఛిల, తారే గోరా ఉద్ధారిల,
తారా హైల పతితపావన॥3॥
గోర ద్విజ నటరాజ, బాన్ధహ హృదయ-మాఝే,
కి కరిబే సంసార-శయన।
నరోత్తమదాసే కహే, గోరా-సమ కేహ నహే,
నా భజితే దేయ ప్రేమధన॥4॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥ हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥