श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 8: शिष्यपरम्परा, माहात्म्य और उपसंहार  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  6.8.53 
समस्ततीर्थस्नानानि समस्तामरसंस्तुति:।
कृता तेन भवेदेतद्य: शृणोति दिने दिने॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य प्रतिदिन इसे सुनता है, वह मानो समस्त तीर्थों में स्नान कर चुका है और समस्त देवताओं की स्तुति कर चुका है ॥53॥
 
A person who listens to this every day is as if he has bathed in all the holy places and has praised all the gods. ॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)