vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 6: षष्ठ अंश
»
अध्याय 8: शिष्यपरम्परा, माहात्म्य और उपसंहार
»
श्लोक 44
श्लोक
6.8.44
भागुरि: स्तम्भमित्राय दधीचाय स चोक्तवान्।
सारस्वताय तेनोक्तं भृगुस्सारस्वतेन च॥ ४४॥
अनुवाद
तब भागुरि ने स्तंभमित्र को, स्तंभमित्र ने दधीचि को, दधीचि ने सारस्वत को और सारस्वत ने भृगु को सुनाया। 44॥
Then Bhaguri narrated it to Stambhamitra, Stambhamitra to Dadhichi, Dadhichi to Saraswat and Saraswat to Bhrigu. 44॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×