श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 7: ब्रह्मयोगका निर्णय  »  श्लोक 89
 
 
श्लोक  6.7.89 
सा यदा धारणा तद्वदवस्थानवती तत:।
किरीटकेयूरमुखैर्भूषणै रहितं स्मरेत्॥ ८९॥
 
 
अनुवाद
जब यह धारणा भी स्थिर हो जाए तब मुकुट, शिरस्त्राण आदि अलंकारों से रहित भगवान् के स्वरूप का स्मरण करो ॥89॥
 
When this perception also becomes stable then remember the form of God devoid of ornaments like crown, headgear etc. 89॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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