श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 7: ब्रह्मयोगका निर्णय  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  6.7.8 
श्रीपराशर उवाच
प्रहृष्टस्साध्विति प्राह तत: केशिध्वजो नृप:।
खाण्डिक्यजनकं प्रीत्या श्रूयतां वचनं मम॥ ८॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशरजी बोले - तब राजा केशिध्वज ने प्रसन्न होकर खाण्डिक्य जनक को धन्यवाद दिया और प्रेमपूर्वक कहा, मेरी बात सुनो - ॥8॥
 
Shri Parasharji said - Then King Keshidhwaj became happy and thanked Khandikya Janak and said lovingly, listen to my words - ॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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