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श्लोक 6.7.79  |
यच्च मूर्त्तं हरे रूपं यादृक्चिन्त्यं नराधिप।
तच्छ्रूयतामनाधारा धारणा नोपपद्यते॥ ७९॥ |
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| अनुवाद |
| हे नरेन्द्र! बिना किसी आधार के धारणा नहीं की जा सकती; अतः जिस प्रकार भगवान के स्वरूप का ध्यान करना चाहिए, उसे सुनो। 79। |
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| O Narendra! Dharana cannot be done without any basis; therefore listen to the way in which one should meditate on the form of God. 79. |
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