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श्लोक 6.7.73  |
तद्रूपं विश्वरूपस्य तस्य योगयुजा नृप।
चिन्त्यमात्मविशुद्धॺर्थं सर्वकिल्बिषनाशनम्॥ ७३॥ |
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| अनुवाद |
| हे राजन! आत्मशुद्धि के लिए योगाभ्यासी को भगवान् विश्वरूप का ही चिन्तन करना चाहिए जो समस्त पापों का नाश करने वाला है। 73॥ |
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| O king! For self-purification, a yoga practitioner should think only about that form of Lord Vishvarupa which destroys all sins. 73॥ |
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