श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 7: ब्रह्मयोगका निर्णय  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  6.7.73 
तद्रूपं विश्वरूपस्य तस्य योगयुजा नृप।
चिन्त्यमात्मविशुद्धॺर्थं सर्वकिल्बिषनाशनम्॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! आत्मशुद्धि के लिए योगाभ्यासी को भगवान् विश्वरूप का ही चिन्तन करना चाहिए जो समस्त पापों का नाश करने वाला है। 73॥
 
O king! For self-purification, a yoga practitioner should think only about that form of Lord Vishvarupa which destroys all sins. 73॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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