| श्री विष्णु पुराण » अंश 6: षष्ठ अंश » अध्याय 7: ब्रह्मयोगका निर्णय » श्लोक 72 |
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| | | | श्लोक 6.7.72  | जगतामुपकाराय न सा कर्मनिमित्तजा।
चेष्टा तस्याप्रमेयस्य व्यापिन्यव्याहतात्मिका॥ ७२॥ | | | | | | अनुवाद | | इन रूपों में अथाह भगवान् की व्यापक एवं अनिर्वचनीय चेष्टाएँ जगत् के हित के लिए ही होती हैं, कर्म के कारण नहीं होतीं ॥72॥ | | | | In these forms, the extensive and inexplicable efforts of the immeasurable God are only for the benefit of the world and are not due to karma. 72॥ | | ✨ ai-generated | | |
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