श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 7: ब्रह्मयोगका निर्णय  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  6.7.70 
समस्ता: शक्तयश्चैता नृप यत्र प्रतिष्ठिता:।
तद्विश्वरूपवैरूप्यं रूपमन्यद्धरेर्महत्॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! ये सब शक्तियाँ जिनमें स्थित हैं, वह भगवान् का दूसरा रूप है जो विश्वरूप से भी अद्वितीय है ॥70॥
 
O King! The one in whom all these powers are situated is the second form of the Lord which is unique apart from the cosmic form. ॥ 70॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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