| श्री विष्णु पुराण » अंश 6: षष्ठ अंश » अध्याय 7: ब्रह्मयोगका निर्णय » श्लोक 68 |
|
| | | | श्लोक 6.7.68  | एतान्यशेषरूपाणि तस्य रूपाणि पार्थिव।
यतस्तच्छक्तियोगेन युक्तानि नभसा यथा॥ ६८॥ | | | | | | अनुवाद | | हे राजन! ये सब रूप भगवान् के शरीर हैं, क्योंकि ये सब आकाश के समान उनकी शक्ति से व्याप्त हैं ॥68॥ | | | | O King, all these forms are the body of the Supreme Lord, because all of them are pervaded by His energy like the sky. ॥ 68॥ | | ✨ ai-generated | | |
|
|