| श्री विष्णु पुराण » अंश 6: षष्ठ अंश » अध्याय 7: ब्रह्मयोगका निर्णय » श्लोक 47 |
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| | | | श्लोक 6.7.47  | केशिध्वज उवाच
आश्रयश्चेतसो ब्रह्म द्विधा तच्च स्वभावत:।
भूप मूर्त्तममूर्त्तं च परं चापरमेव च॥ ४७॥ | | | | | | अनुवाद | | केसिध्वज बोले - हे राजन! मन का आश्रय ब्रह्म है, जो स्वभाव से दो प्रकार का है - मूर्त और अमूर्त, अथवा अदृश्य और अन्यरूप ॥47॥ | | | | Kesidhwaj said, 'O King! The shelter of the mind is Brahman, which is of two types by nature, i.e., tangible and intangible, or invisible and other-form. ॥ 47॥ | | ✨ ai-generated | | |
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