श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 7: ब्रह्मयोगका निर्णय  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  6.7.46 
खाण्डिक्य उवाच
कथ्यतां मे महाभाग चेतसो यश्शुभाश्रय:।
यदाधारमशेषं तद्धन्ति दोषमलोद्भवम्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
खाण्डिक्य बोले, 'हे महामुने! मुझे बताइये कि मन का वह शुभ आश्रय क्या है, जिसका आश्रय लेने से मन के सभी दोष नष्ट हो जाते हैं?'
 
Khandikya said, 'O great one! Tell me, what is that auspicious shelter of the mind, by taking shelter of which all the defects of the mind are destroyed?'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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