| श्री विष्णु पुराण » अंश 6: षष्ठ अंश » अध्याय 7: ब्रह्मयोगका निर्णय » श्लोक 45 |
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| | | | श्लोक 6.7.45  | प्राणायामेन पवने प्रत्याहारेण चेन्द्रिये।
वशीकृते तत: कुर्यात्स्थितं चेतश्शुभाश्रये॥ ४५॥ | | | | | | अनुवाद | | इस प्रकार प्राणायाम द्वारा वायु को और प्रत्याहार द्वारा इन्द्रियों को वश में करके मन को उसकी शुभ शरण में रखना चाहिए ॥45॥ | | | | In this way, by subduing the air through Pranayama and the senses through Pratyahara, one should place the mind in its auspicious shelter. 45॥ | | ✨ ai-generated | | |
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