| श्री विष्णु पुराण » अंश 6: षष्ठ अंश » अध्याय 7: ब्रह्मयोगका निर्णय » श्लोक 37 |
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| | | | श्लोक 6.7.37  | स्वाध्यायशौचसन्तोषतपांसि नियतात्मवान्।
कुर्वीत ब्रह्मणि तथा परस्मिन्प्रवणं मन:॥ ३७॥ | | | | | | अनुवाद | | तथा संयमित मन से स्वाध्याय, स्नान, संतोष और तप का अभ्यास करो तथा मन को निरंतर परब्रह्म में एकाग्र रखो ॥37॥ | | | | And practice self-study, ablution, satisfaction and penance with a balanced mind and keep the mind constantly focused on Parabrahman. 37॥ | | ✨ ai-generated | | |
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