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श्लोक 6.7.2  |
खाण्डिक्य उवाच
केशिध्वज निबोध त्वं मया न प्रार्थितं यत:।
राज्यमेतदशेषं ते यत्र गृध्नन्त्यपण्डिता:॥ २॥ |
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| अनुवाद |
| खाण्डिक्य बोले- हे केशिध्वज! मैंने आपका राज्य क्यों नहीं माँगा, इसका कारण सुनिए। केवल मूर्ख ही राज्य की इच्छा रखते हैं॥ 2॥ |
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| Khandikya said- O Keshidhwaj! Listen to the reason why I did not ask for your kingdom. Only fools aspire for kingdoms.॥ 2॥ |
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