श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 7: ब्रह्मयोगका निर्णय  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  6.7.2 
खाण्डिक्य उवाच
केशिध्वज निबोध त्वं मया न प्रार्थितं यत:।
राज्यमेतदशेषं ते यत्र गृध्नन्त्यपण्डिता:॥ २॥
 
 
अनुवाद
खाण्डिक्य बोले- हे केशिध्वज! मैंने आपका राज्य क्यों नहीं माँगा, इसका कारण सुनिए। केवल मूर्ख ही राज्य की इच्छा रखते हैं॥ 2॥
 
Khandikya said- O Keshidhwaj! Listen to the reason why I did not ask for your kingdom. Only fools aspire for kingdoms.॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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