| श्री विष्णु पुराण » अंश 6: षष्ठ अंश » अध्याय 7: ब्रह्मयोगका निर्णय » श्लोक 19 |
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| | | | श्लोक 6.7.19  | अनेकजन्मसाहस्रीं संसारपदवीं व्रजन्।
मोहश्रमं प्रयातोऽसौ वासनारेणुकुण्ठित:॥ १९॥ | | | | | | अनुवाद | | यह जीवात्मा हजारों जन्मों तक सांसारिक भोगों में लिप्त होकर और उनकी कामनाओं की धूल से आवृत होकर केवल आसक्ति रूपी थकान को ही प्राप्त होता है ॥19॥ | | | | This soul, by being involved in worldly pleasures for thousands of births and being covered with the dust of their desires, attains only the fatigue of attachment. ॥19॥ | | ✨ ai-generated | | |
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