| श्री विष्णु पुराण » अंश 6: षष्ठ अंश » अध्याय 7: ब्रह्मयोगका निर्णय » श्लोक 13 |
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| | | | श्लोक 6.7.13  | आकाशवाय्वग्निजलपृथिवीभ्य: पृथक्स्थिते।
आत्मन्यात्ममयं भावं क: करोति कलेवरे॥ १३॥ | | | | | | अनुवाद | | जब आत्मा आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी आदि से सर्वथा पृथक है, तब कौन बुद्धिमान् मनुष्य शरीर में आत्मज्ञान प्राप्त करेगा? 13॥ | | | | When the soul is completely separate from sky, air, fire, water and earth etc. then which intelligent person will attain enlightenment in the body? 13॥ | | ✨ ai-generated | | |
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