श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 7: ब्रह्मयोगका निर्णय  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  6.7.10 
तदिदं ते मनो दिष्टॺा विवेकैश्वर्यतां गतम्।
तच्छ्रूयतामविद्यायास्स्वरूपं कुलनन्दन॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हे कुलपुत्र! यह बड़े सौभाग्य की बात है कि तुम्हारा मन विवेकशील हो गया है; अतः अज्ञान के स्वरूप को सुनो॥10॥
 
O son of the clan! It is a matter of great fortune that your mind has become prudent; therefore, listen to the nature of ignorance.॥ 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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