श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 5: आध्यात्मिकादि त्रिविध तापोंका वर्णन, भगवान् तथा वासुदेव शब्दोंकी व्याख्या और भगवान् के पारमार्थिक स्वरूपका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  6.5.8 
शीतवातोष्णवर्षाम्बुवैद्युतादिसमुद्भव:।
तापो द्विजवर श्रेष्ठै: कथ्यते चाधिदैविक:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
और हे ब्राह्मण! शीत, उष्ण, वायु, वर्षा, जल और विद्युत आदि से होने वाले दुःखों को श्रेष्ठ पुरुष आधिदैविक कहते हैं॥8॥
 
And, O Brahmin! The sufferings caused by cold, heat, wind, rain, water and electricity etc. are called by the best men as Adhidaivik. ॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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