vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 6: षष्ठ अंश
»
अध्याय 5: आध्यात्मिकादि त्रिविध तापोंका वर्णन, भगवान् तथा वासुदेव शब्दोंकी व्याख्या और भगवान् के पारमार्थिक स्वरूपका वर्णन
»
श्लोक 7
श्लोक
6.5.7
मृगपक्षिमनुष्याद्यै: पिशाचोरगराक्षसै:।
सरीसृपाद्यैश्च नृणां जायते चाधिभौतिक:॥ ७॥
अनुवाद
मृग, पक्षी, मनुष्य, भूत, सर्प, पिशाच और सरीसृप (बिच्छू) आदि से मनुष्य को जो कष्ट प्राप्त होता है, उसे शारीरिक कहते हैं ॥7॥
The suffering that a human being receives from deer, birds, humans, ghosts, snakes, devils and reptiles (scorpions) etc. is called physical. ॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×