vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 6: षष्ठ अंश
»
अध्याय 5: आध्यात्मिकादि त्रिविध तापोंका वर्णन, भगवान् तथा वासुदेव शब्दोंकी व्याख्या और भगवान् के पारमार्थिक स्वरूपका वर्णन
»
श्लोक 63
श्लोक
6.5.63
मनुरप्याह वेदार्थं स्मृत्वा यन्मुनिसत्तम।
तदेतच्छ्रूयतामत्र सम्बन्धे गदतो मम॥ ६३॥
अनुवाद
हे महामुनि! इस विषय में मनुजी ने जो कहा है, उसे मैं वेदों का अर्थ स्मरण करके आपसे कह रहा हूँ। कृपया उसे सुनें।
O great sage, I am telling you what Manuji has said in this matter, remembering the meaning of the Vedas. Please listen to it.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×