vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 6: षष्ठ अंश
»
अध्याय 5: आध्यात्मिकादि त्रिविध तापोंका वर्णन, भगवान् तथा वासुदेव शब्दोंकी व्याख्या और भगवान् के पारमार्थिक स्वरूपका वर्णन
»
श्लोक 45
श्लोक
6.5.45
करम्भवालुकावह्नियन्त्रशस्त्रादिभीषणे ।
प्रत्येकं नरके याश्च यातना द्विज दु:सहा:॥ ४५॥
अनुवाद
हे द्विज! फिर गरम बालू, अग्नि-यंत्र और शस्त्र आदि घोर नरकों में जो यातनाएँ सहनी पड़ती हैं, वे अत्यन्त असहनीय हैं। 45॥
Hey Dwija! Then the tortures that have to be endured in the most dreadful hells like hot sand, fire engines and weapons are extremely unbearable. 45॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×