श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 5: आध्यात्मिकादि त्रिविध तापोंका वर्णन, भगवान् तथा वासुदेव शब्दोंकी व्याख्या और भगवान् के पारमार्थिक स्वरूपका वर्णन  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.5.27 
जराजर्जरदेहश्च शिथिलावयव: पुमान्।
विगलच्छीर्णदशनो वलिस्नायुशिरावृत:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
जब शरीर बूढ़ा और जीर्ण हो जाता है, तब मनुष्य के सब अंग दुर्बल हो जाते हैं, उसके दांत बूढ़े होकर गिर जाते हैं और शरीर झुर्रियों और स्नायुओं से आच्छादित हो जाता है ॥27॥
 
When the body becomes old and worn out, all the limbs of a man become weak, his teeth become old and fall out and the body becomes covered with wrinkles and nerves.॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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