श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 5: आध्यात्मिकादि त्रिविध तापोंका वर्णन, भगवान् तथा वासुदेव शब्दोंकी व्याख्या और भगवान् के पारमार्थिक स्वरूपका वर्णन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  6.5.23 
को धर्म: कश्च वाधर्म: कस्मिन्वर्तेऽथ वा कथम्।
किं कर्तव्यमकर्तव्यं किं वा किं गुणदोषवत्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
धर्म क्या है? अधर्म क्या है? किसी परिस्थिति में मुझे कैसा आचरण करना चाहिए? कर्तव्य क्या है और अकर्तव्य क्या है? अथवा पुण्य क्या है और पाप क्या है?॥23॥
 
What is Dharma? What is Adharma? How should I behave in a given situation? What is duty and what is non-duty? Or what is virtuous and what is faulty?'॥23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)