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श्लोक 6.5.17  |
कण्टकैरिव तुन्नाङ्ग: क्रकचैरिव दारित:।
पूतिव्रणान्निपतितो धरण्यां कृमिको यथा॥ १७॥ |
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| अनुवाद |
| उस समय वह जीवात्मा दुर्गन्धयुक्त फोड़े से गिरे हुए काँटेदार कीड़े के समान अथवा आरी से कटे हुए कीड़े के समान पृथ्वी पर गिरता है ॥17॥ |
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| At that time the soul falls on the earth like a thorn-pierced insect falling from a foul-smelling boil or like a saw-cut worm. ॥17॥ |
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