श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 5: आध्यात्मिकादि त्रिविध तापोंका वर्णन, भगवान् तथा वासुदेव शब्दोंकी व्याख्या और भगवान् के पारमार्थिक स्वरूपका वर्णन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.5.14 
जायमान: पुरीषासृङ्मूत्रशुक्राविलानन:।
प्राजापत्येन वातेन पीडॺमानास्थिबन्धन:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जन्म के समय उसका मुख मल, मूत्र, रक्त और वीर्य से ढका हुआ है और उसके सभी रंध्र प्रजापत्य वायु से अत्यन्त पीड़ित हैं ॥14॥
 
At the time of birth, his mouth is covered with faeces, urine, blood and semen, and all his ligaments are extremely afflicted by the prajapatya (constricting womb) wind. ॥14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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