श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 4: प्राकृत प्रलयका वर्णन  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  6.4.50 
इत्येष तव मैत्रेय कथित: प्राकृतो लय:।
आत्यन्तिकमथो ब्रह्मन्निबोध प्रतिसञ्चरम्॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
हे मैत्रेय! इस प्रकार मैंने तुमसे जगत् का स्वाभाविक प्रलय कहा; अब तुम परम प्रलय का वर्णन सुनो ॥50॥
 
O Maitreya, thus I have described to you the natural dissolution of the world; now listen to the description of the ultimate dissolution. ॥50॥
 
इति श्रीविष्णुपुराणे षष्ठेंऽशे चतुर्थोऽध्याय:॥ ४॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)