श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 4: प्राकृत प्रलयका वर्णन  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  6.4.44 
ह्रस्वदीर्घप्लुतैर्यत्तु किञ्चिद्वस्त्वभिधीयते।
यच्च वाचामविषयं तत्सर्वं विष्णुरव्यय:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
जो कुछ तीन प्रकार के स्वरों - लघु, दीर्घ और प्लुत - से कहा जाता है और जो कुछ वाणी का विषय नहीं है, वह सब भी अविनाशी विष्णु ही हैं ॥ 44॥
 
Whatever is said with the three types of vowels – short, long and plut – and whatever is not the subject of speech, all that is also the indestructible Vishnu. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)