श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 4: प्राकृत प्रलयका वर्णन  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  6.4.42 
ऋग्यजुस्सामभिर्मार्गै: प्रवृत्तैरिज्यते ह्यसौ।
यज्ञेश्वरो यज्ञपुमान‍्पुरुषै: पुरुषोत्तम:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
लोग ऋक्, यजु और सामवेद के मार्ग से उन यज्ञपति पुरूषोत्तम यज्ञपुरुष की ही पूजा करते हैं। 42॥
 
People worship only those Yagyapati Purushottam Yagya Purusha according to the path of Rik, Yaju and Samveda. 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)