श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 4: प्राकृत प्रलयका वर्णन  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  6.4.41 
प्रवृत्तं च निवृत्तं च द्विविधं कर्म वैदिकम्।
ताभ्यामुभाभ्यां पुरुषैस्सर्वमूर्त्तिस्स इज्यते॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
वैदिक कर्म दो प्रकार के हैं - प्रवृत्तिरूप (कर्मयोग) और निवृत्तिरूप (सांख्ययोग)। इन दोनों प्रकार के कर्मों से उन परम पुरुषोत्तम की ही पूजा होती है ॥41॥
 
Vedic karma is of two types – Pravrttirupa (Karmayoga) and Nivruttirupa (Sankhyayoga). Through both these types of deeds, only that Supreme Being Purushottam is worshipped. 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)