श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 4: प्राकृत प्रलयका वर्णन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  6.4.29 
उर्वी महांश्च जगत: प्रान्तेऽन्तर्बाह्यतस्तथा॥ २९॥
 
 
अनुवाद
जैसे पृथ्वी और महातत्त्व ब्रह्माण्ड के आन्तरिक जगत् की आदि और अन्त की सीमाएँ हैं, वैसे ही बाह्य जगत् की भी सीमाएँ हैं ॥29॥
 
Just as the Earth and the Mahatattva are the beginning and end boundaries of the inner world of the universe, so are the boundaries of the outer world as well. ॥29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)